Aakhiri Rasool -Antim Gyaan

Aakhiri-Rasool-Aakhiri-Gyaan

सच कहूँ तो Aakhiri Rasool -Antim Gyaan की अवधारणा ने ही मुस्लिम समाज में जाहिलों की वो फ़ौज पैदा की है जिसे मौलवी-मौलाना अपने फायदे के लिए भेड़ों की तरह हांकते हैं।

कोरोना भारत में जब फैलना शुरू हुआ तो कुछ लापरवाह Tablighi जमाती एक स्थान पर फंसे पाए गए,
जिसे मीडिया ने प्रचारित “छुपे” होने के तौर पर किया।
मीडिया को तो टीआरपी बढ़ाने के लिए पसंदीदा विषय जो मिल गया था।
हर चैनल Corona Jihad की ख़बरों से पटा पड़ा था।
सालों से Selective Secularism की पीड़ा का दंश झेलते आ रहे हिन्दू हृदय को भी संतोष मिला।

अब मीडिया की कारगुजारी देख मुस्लिमों से थोड़ी सहानुभूति हुई ही थी
कि देश भर से बवाल की खबरें आने लगी।
तस्वीरें झूठ नहीं बोलती।
कहीं नर्सों पर हमले, तो कहीं पुलिस, डॉक्टरों पर पथराव तो कहीं महिलाओं के सामने निर्लज्ज आचरण।

जब “जीवन-मृत्यु-लाभ-हानि-यश-अपयश को हरि इच्छा मान कर” जीने वाली कौमें राजाज्ञा के सम्मान में घर बैठीं थीं,
तब जाहिलों की एक जमात थी जिसे घर में रहने मात्र के लिए,
कोरोना टेस्टिंग कराने के लिए कहने मात्र के लिए मौलानाओं की फ़ौज टीवी पर बैठानी पड़ी।

सिर्फ़ एक ही जमात थी जिसे घर में रहने मात्र के लिए 1400 साल पुरानी किताब से रसूल के रिफरेन्स दिए गए। खुद का कोई कॉमन सेंस है ही नहीं? ऐसा हो भी क्यों न? Aakhiri Rasool -Antim Gyaan तो 1400 वर्ष पूर्व ही अवतरित हो गया था, तो अब अंतिम ज्ञान से आगे बुद्धि-विवेक-तर्क की संभावना बची ही कहां है?

मुस्लिमों के साथ नया खेल खेला जाने लगा

तब एक नया खतरनाक खेल खेला जाने लगा जिसके तहत भारत में किए गए किसी कथित धार्मिक ट्वीट पर किसी भारतीय को विदेशी धरती पर गिरफ्तार करने की माँग हो रही थी जो न केवल भारत की संप्रभुता का अक्षम्य उल्लंघन है, बल्कि तब्लीगीयों (Tablighi) के पक्ष में की जा रही ब्लैकमेलिंग भी…

मुस्लिम मित्र, इस क्रोनोलॉजी को समझें। पहले आप कोरोना के संकट के समय बदनाम हुए/किये गए।
फिर मौलानाओं की फौज ने अशिक्षित मुस्लिम तबके को गैर-जिम्मेदाराना आचरण के लिए प्रेरित किया।
फिर आपको अरब के बहाने देश की संप्रभुता का विरोधी प्रोजेक्ट किया जाने लगा।
जो संविधान आपको लाउडस्पीकर बजाने का हक देता है, वही संविधान सोनू निगम को अपनी शिकायत बयान करने का हक भी देता है।

आप ये मत भूलिए!

मत भूलिए कि यह वही अरब है जहां के आईपी एड्रेस से “कोरोना से कुछ नहीं होता” जैसे सैकड़ों वीडियो TikTok पर अपलोड कर भारतीय मुसलमानों की नकारात्मक छवि बनाने की कोशिश की गई। ये वही अरब है जो भारतीय उपमहाद्वीप से आने वाले मुसलमानों को हिकारत की दृष्टि से देखता है। इन्हें मुस्लिमों के हितों से कुछ लेना-देना नहीं। यह बस चाहते हैं कि आप बदनाम हों, हिन्दू-मुस्लिम की तलवार खिंचे, भारत जैसे 130 करोड़ आबादी वाले देश में कोरोना भारी जान-माल की तबाही करे और हमारी अर्थव्यवस्था चौपट हो, और हिन्दू-मुसलमान एक-दूसरे की लाशें गिने।

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इनके जाल में मत फंसिए, अपनी अक्ल लगाइये। एक मोमीन होने से पहले एक सच्चे भारतीय होने का परिचय दीजिये।

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