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Copyright-on-Internet

मानव के जेहन में सवाल बहुत सारे पैदा होते रहते है कुछ का जवाब उसे मिल जाता है, कुछ का खुद ढूंढना पड़ता है। बहरहाल यहां Copyright संबन्धित अपने पक्ष के बारे में हम आपको बताना चाहेंगे।

‘नास्तिकता का औचित्य’ तर्कशील हिन्दी विचारों को इंटरनेट पर एक जगह लाने का अपने आप में इकलौता व अनूठा प्रयास है। इस वेबसाइट पर संकलित सभी विचार रचनाकारों द्वारा खुद सार्वजनिक किए गए हैं। इसलिये इस ब्लॉग में संकलित कोई भी रचना या अन्य सामग्री किसी भी तरह के सार्वजनिक लाइसेंस के अंतर्गत उपलब्ध है। Progressive and rational views collected in Atheism-Justification are made public by the thinkers or authors concerned and are therefore available under any public license.

‘नास्तिकता का औचित्य’ नास्तिकता अनुसंधान फाउंडेशन द्वारा स्थापित और संचालित एक ब्लॉग है। यद्यपि इसकी संभावना बहुत ही कम है तथापि यह संभव है कि किसी रचनाकार या प्रकाशक को उनके द्वारा लिखी गई या प्रकाशित की गई किसी रचना के ‘नास्तिकता का औचित्य’ यानि Atheism-Justification में होने पर आपत्ति हो। इसी से सम्बंधित कुछ बातें यहाँ दी जा रही हैं।

‘नास्तिकता का औचित्य’ पूरी तरह से अव्यावसायिक जालस्थल है। यहाँ विज्ञापन सिर्फ इसलिए है जिससे इस ब्लॉग के रखरखाव पर हुए खर्च का कुछ अंश निकल सके। यह नवीनतम सीएमएस तकनीक पर आधारित एक ब्लॉग है जिसे हिन्दी में पढ़ने विश्व भर से लोग आते हैं। इस ब्लॉग के अस्तित्व और विकास के पीछे किसी का कोई भी आर्थिक हित नहीं है। ‘नास्तिकता का औचित्य’ ब्लॉग को आरंभ करने का मुख्य उद्देश्य सभी समाजों में व्याप्त अन्धास्थाओं, अंधविश्वास, पाखण्ड, कुरीतियां, अवैज्ञानिकता और धार्मिक संगठनों द्वारा फैलाई जा रही भ्रांतियों को दूर कर एक तर्कशील व वैज्ञानिक चेतना युक्त समाज की स्थापना करना है। इसके लिए तर्कशीलता के साथ हिन्दी में लिखे गए उन तमाम विचारों को इंटरनेट पर एक जगह प्रतिष्ठित या संग्रह करना है जिससे पूरा विश्व इसका लाभ उठा सके। नास्तिकता का औचित्य ब्लॉग की स्थापना के पीछे एक ही आशा है।

कि इस ब्लॉग के अस्तित्व में आने से उन तमाम स्वतंत्र चिंतकों एंव तर्कशील लोगों के स्वतंत्र विचारों का प्रचार-प्रसार पूरे विश्व में हो सके। जो किसी भी धारणा व आक्षेप से मुक्त रहते हैं।

नास्तिकता का औचित्य में संकलित सभी रचनाओं के साथ रचनाकारों का नाम दिया जाता है जिससे रचनाकार को उचित श्रेय मिलता है

इंटरनेट आज के युग में सूचना प्रसार का सबसे बड़ा, लोकप्रिय और सशक्त माध्यम है। वर्तमान युग में इंटरनेट पर किसी भी सूचना को फैलने से रोका नहीं जा सकता। हरीशंकर परसाई या सआदत हसन मंटो की कहानियां इस समय सैकड़ों जालस्थलों पर उपलब्ध है। हिन्दी में तर्कशीलों की हजारों गद्य/पध रचनाएँ सोशल मीडिया पर जहाँ-तहाँ फैली पड़ी हैं। नास्तिकता का औचित्य उन तमाम रचनाओं को एक स्थान पर लाने का एक प्रयास मात्र है। रचनाकार स्वयं अपनी रचनाओं को नास्तिकता का औचित्य में संकलित करना चाहते हैं क्योंकि इससे उन रचनाकार की रचनाओं को विश्वभर में पढा़ और सराहा जा सकता है। जब किसी आर्थिक लाभ को लेकर रचनाओं को संकलित या प्रयोग किया जाता है तभी रचनाकारों को आपत्ति होती है।

लेकिन नास्तिकता का औचित्य की पूर्णतया अव्यावसायिक प्रकृति को देखते हुए प्रगतिशील एंव तर्कशील विचारक (Copyright holder) इंटरनेट पर नास्तिकता का औचित्य जैसे संकलन से प्रसन्न ही हैं। नास्तिकता का औचित्य के प्रशंसको में हिन्दी के बहुत से प्रख्यात स्वतंत्र विचारक भी शामिल हैं। और बहुत से विचारक जो अभी इस ब्लॉग में संकलित नहीं हैं -वे भी अपनी रचनाओं को ब्लॉग में संकलित करने के इच्छुक हैं।

देखा गया है कि प्रिंट माध्यम के पाठक और इंटरनेट के पाठक अलग-अलग होते हैं। जो लोग पुस्तक खरीद कर पढ़ने में रुचि रखते हैं -उन्हें इंटरनेट पर उपलब्ध मूल्यरहित सामग्री भी अच्छी नहीं लगती और वे पुस्तक खरीदकर ही पढ़ते हैं। साथ ही लोग पुस्तकें इस लिये भी खरीदते हैं क्योंकि पुस्तकों का घर और पुस्तकालय इत्यादि में संकलन किया जा सकता है और जब चाहे उसे पढ़ा जा सकता है। इसलिये नास्तिकता का औचित्य, किसी भी रचनाकार या प्रकाशक को किसी भी तरह की आर्थिक हानि नहीं पहुँचाता। इसके विपरीत यह ब्लॉग रचनाकार की रचनाओं को वहाँ तक भी पहुँचाता है जहाँ उनकी प्रिंट पुस्तक नहीं पँहुच पाती। इससे रचनाकार के पाठक-समूह में वृद्धि होती है। नास्तिकता का औचित्य में पुस्तकों के प्रकाशकों के नाम और पते भी देने की कोशिश की जाती है

इससे उन लोगों को प्रकाशक से सम्पर्क करने में सुविधा होती है जो पुस्तक को खरीदना चाहते हैं।

इस प्रकार ‘नास्तिकता का औचित्य’ रचनाकार, प्रकाशक और पाठक सभी के लिये लाभकर है। इससे भी महत्वपूर्ण यह है कि नास्तिकता का औचित्य (हिन्दी), हिन्दी भाषा को विश्व भर में प्रसारित करने का एक सशक्त माध्यम है।

फिर भी यदि किसी रचनाकार / Copyright holder को कोई आपत्ति है तो उनसे अनुरोध कि यहाँ प्रकाशित तर्कशील विचारों को हिन्दी में प्रचार-प्रसार को ध्यान में रखते हुए, ‘नास्तिकता का औचित्य’ के योगदानकर्ताओं से अनजाने में हुई भूल को क्षमा कर दें।

यदि Copyright holder को कोई आपत्ति है तो कृपया हमें इस ई-मेल पते contact@atheismjustification.com पर सूचित करें। जिन रचनाओं के नास्तिकता का औचित्य में होने पर उनके कॉपीराइट-धारक आपत्ति प्रकट करेंगे उन्हें यहाँ से हटा दिया जाएगा।