Dharm | क्या आपको लगता है कि धर्म का ईश्वर से कोई सम्बन्ध है?

इतिहास के हर काल में धर्म अपने अनुनाइयों को धर्म से ईश्‍वर का सम्बन्ध पर हमेशा झूठा आश्‍वासन देता आया है। आपकी हर समस्या का समाधान ईश्वर करेगा। हर धर्म बस यही बताता है। लेकिन आप जानते हैं कि दुनिया में सभी समस्या का समाधान आदमी खुद करता है और धार्मिक उसका श्रेय ईश्वर को दे डालते हैं। हर धर्म के ठेकेदार अपने धर्म को ईश्‍वरी कृति साबित करने की कोशिशों में लगा रहता है।

ईश्‍वर को किसी ने न तो देखा है न उसका सार्वजनिक प्रत्‍यक्ष अनुभव किया है। यदि कोई अलौकिक अदृश्य शक्ति होगी तो भी संस्‍कृति, भाषा, परंपरा, किताबों, के घालमेल और सहारों से जिंदगी जी रहे धर्म का उससे क्‍या संबंध हो सकता है भला???

क्‍या ईश्‍वर को इंसानी धर्म, कल्‍पना, इजादों की जरूरत है?

धर्म और तमाम धार्मिक बातें निपट इंसानी ईज़ाद है, चालाक खोपड़ियों का अविष्‍कार है। विवेकवान लोग धर्म की उलजलूल, तथ्‍यहीन, गोलमोल बातों पर सवाल खडे करते हैं। लेकिन धर्म के तथ्‍यहीन बातों को आस्‍था का सवाल समझ कर जो लोग आंखें बंद किए उसे विश्‍वास करते हैं, उन लोगों को ही धर्म के ठेकेदार आर्थिक शोषण का साधन बना लेते हैं। ऐसे लोग ही धर्म के गुलाम साबित होते हैं।

धर्म के कारोबार से जुड़े लोगों के ठाठ के क्‍या कहने !!! वे बिना मेहनत धनवानों सा शानदार जीवन जीते हैं। धर्म के आड़ में ऐसे लोग करोडों रूपये कमाते हैं। उनके बैंक खातों में करोड़ों, अरबों रूपये होते है और दृष्यमान, अदृष्यमान हजारों संपत्तियाँ होती हैं।

इसीलिए ऐसे लोग धर्म के धंधें को बढाने के लिए दिन-रात एक किए रहते हैं। ऐसे लोगों के बारे जरा ध्‍यान से सोचने की कोशिश कीजिए, वास्‍तविकता सामने आ ही जाएगी। ये लोग अपने धंधे के रास्ते में आने वाले हर बाधा को खूँखार ढंग से हटाते हैं। आपके आसपास ऐसे कौन लोग हैं बस ज़रा सा दिमाग लगाने की जरूरत। सब कुछ खुद-ब-ख़ुद दृश्यमान हो जाएगा।

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