Nightfall से प्रेरित (Science fiction story by Isaac Asimov)

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Inspired by nightfall

“Nightfall” is a 1941 science fiction novelette by American writer Isaac Asimov about the coming of darkness to the people of a planet ordinarily illuminated by sunlight at all times. It was adapted into a novel with Robert Silverberg in 1990.

प्रसिद्ध अमेरिकी साइंस-फ़िक्शन लेखक Isaac Asimov (आइज़क एसिमोव) द्वारा लिखी गयी कहानी “Nightfall” The planet Lagash (“Kalgash” in the novel) is constantly illuminated by at least one of the six suns of its multiple star system. Lagash has areas of darkness (in caves, tunnels, etc.), but “night” does not exist.

Short story of nightfall

Lagash नामक एक ऐसे काल्पनिक ग्रह के बारे में है जो चारों ओर से 6 सूर्यों से घिरा हुआ है। इन 6 सूर्यों के कारण Lagash पर हर समय उजाला रहता है। वहां के निवासियों को पता ही नहीं होता कि “रात” नाम की भी कोई चीज होती है। फिर एक दिन, Lagash सभ्यता के कुछ वैज्ञानिक “गुरुत्व के नियमों” की खोज करते हैं और तब सब चकित रह जाते हैं जब उन्हें पता चलता है कि आसमान में 6 सूर्यों के अतिरिक्त भी कोई ऐसी चीज है जो Lagash पर निरन्तर गुरुत्वाकर्षण आरोपित करती है। वह चीज कुछ और नहीं, बल्कि एक चंद्रमा होता है जिसे 6 सूर्यों की प्रचंड आभा के कारण नंगी आंखों से देख लेना Lagash वासियों के लिए संभव नहीं होता।

What was that rare coincidence?

Inspired by nightfall

बहुत जल्द ही वैज्ञानिकों का एक दल यह खोज लेता है कि प्रत्येक 2049 सालों में एक ऐसा दुर्लभ संयोग आता है जब सभी सूर्य कुछ देर के लिए, एक सीध में आ कर, चंद्रमा के पीछे छुप जाते हैं। इस “सूर्यग्रहण” के कारण समूचे ग्रह पर अंधेरा छा जाता है। यह पहला मौका था जब वैज्ञानिकों ने इस गुत्थी को सुलझा लिया था कि फॉसिल्स रिकॉर्ड के अनुसार लगभग हर दो हजार सालों में Lagash पर सभ्यता का अंत क्यों हो जाता है? शायद जीवन में पहली बार अंधकार और रात के आसमान में अरबों सूर्यों का दीदार Lagash वासियों को आतंकित कर देता हो, और अंधेरे के आदी न होने के कारण वे अफरातफरी में जो हाथ में आता है, उसे आग लगा कर प्रकाश उत्पन्न करने की कोशिश करते हों। जो आग, नियंत्रण से बाहर होकर समूचे नगरों को भस्म कर देती हो।

समस्या यह थी कि वैज्ञानिकों की गणना के अनुसार अगला ग्रहण 4 घण्टे बाद शुरू होना था। इससे आगे की कहानी के लिए आप “Nightfall” पढ़ सकते हैं।

Inspired by this story

Nightfall की कहानी को पढ़ने के बाद मेरे दिमाग में कई विचार दस्तक दे रहे हैं। हम इंसान बेहद खुशकिस्मत हैं कि हम Milky-Way आकाशगंगा के केंद्र से 26000 प्रकाशवर्ष दूर एक ऐसे क्षेत्र पर हैं, जहां सितारों की संख्या का घनत्व उतना सघन नहीं, नतीजतन रात का आसमान साफ़ देखा जा सकता है। सूर्य के उदय-अस्त होने की अवधि के आधार पर दिन-रात को परिभाषित किया जा सकता है। आसमान में सूर्य के उदय होने की स्थिति को सिलसिलेवार नोट करते हुए हम वर्ष तथा ऋतुओं की अवधि जान सकते हैं, और ऋतुओं के अनुसार पशुपालन, खेती इत्यादि को भली-भांति अंजाम दे सकते हैं। रात के आसमान ने ही ज्योतिष और खगोल अध्ययन समेत मनोविज्ञान को प्रभावित करने वाली नाना विद्याओं, कयासों तथा दंतकथाओं को जन्म दिया है।

Astronomy is the mother of every branch of science.

सच कहूँ तो खगोल अध्ययन ही विज्ञान की प्रत्येक शाखा की जननी रही है। एक तरह से, पृथ्वी से बाहर खरबों सितारों से दमकता यह अनूठा ब्रह्मांड अपने दीदार मात्र से किसी भी सभ्यता की गति और नियति को प्रभावित करने में सक्षम है। अब सोचिए, अगर इंसानों का जन्म मिल्की-वे के केंद्र के पास किसी ग्रह पर हुआ होता तो? वह केंद्र जहाँ मौजूद ब्लैकहोल से जन्मा क्वेजार खुद खरबों सूर्यों की सम्मिलित ऊर्जा के बराबर रोशनी उत्पन्न करने में सक्षम है। ऐसी स्थिति में न हमें रात में चांद-सितारे दिखते, न कोई खगोलशास्त्र जन्म लेता और हम बाहरी ब्रह्मांड के वास्तविक स्वरूप से हमेशा के लिए वंचित रह जाते।

ज़रूरी नहीं कि स्पेस में ग्रह की स्थिति ही मायने रखती है।
समस्याएं अन्य कारणों से भी उत्पन्न हो सकती हैं।
उदाहरण के लिए हमारा पड़ोसी ग्रह शुक्र यानी Venus…

Air on Venus is 90 times denser than Earth

Nightfall 1990 संस्करण

Venus पर हवा पृथ्वी से 90 गुना ज्यादा सघन है।
जमीन से 45 किमी ऊंचाई तक मौजूद कार्बन-डाई-ऑक्साइड के घने बादल सूर्य की
रोशनी को इस तरह अवरुद्ध कर देते हैं कि शुक्र ग्रह की ज़मीन पर जन्मी किसी भी
सभ्यता के बाशिंदें के लिए यह जानना असंभव होता कि उनके ग्रह पर छाई गाढ़ी धुंध के
ऊपर खरबों सूर्यों को समेटे एक अथाह ब्रह्मांड मौजूद है।
बेचारे शुक्रवासी अपनी छोटी सी दुनिया को ही ब्रहमाण्ड समझ आसमान में सूर्य को उसी तरह देख पाते
जैसे समुद्र की गहराइयों में मौजूद एक Scuba diver ऊपर देखने पर
सूर्य को एक मध्यम रौशनी के स्त्रोत के रूप में देख पाता है।

जरा सोचिए, अगर Venus पर हुई ऐसी कोई सभ्यता किसी दिन “उड़नखटोलों” का निर्माण कर लेती,
और पूरी ज़िंदगी Venus की सरजमीं पर बिता देने वाला कोई युवा पहली बार,
45 किमी. का सफ़र तय करके, बादलों की दुनिया के पार पहुंच जाता, तो उसका क्या हाल होता?

जीवन में प्रथम बार वह वास्तविक ब्रह्मांड का दीदार करता,
खरबों रोशनियों से दमकता एक ऐसा ब्रह्माण्ड जिसका कोई ओर-छोर नहीं।
Venus की सरज़मीन से दिखने वाले ब्रह्मांड से पूरी तरह अलग…
यक़ीनन यह एक आतंकित कर देने वाला अनुभव होता।

Today’s telescopes are capable of looking in any direction, about 47 billion light years away.

आज हमारे टेलिस्कोप किसी भी दिशा में लगभग 47 अरब प्रकाश वर्ष दूर तक देखने में सक्षम हैं।
इस दूरी के बाद यानी दृश्य ब्रहमाण्ड के परे क्या है, यह हम फिलहाल नहीं जानते।
शायद कोई और समानांतर ब्रह्माण्ड… शायद इसी ब्रह्माण्ड के कुछ अनदेखे क्षेत्र…

मैं कभी-कभी सोचता हूँ कि अगर कभी इंसान पलक झपकते ही ब्रह्मांड की बाउंडरी पर पहुंच जाएं,
तो कहीं शुक्र वासियों की तरह हमें कुछ अप्रत्याशित तो देखने को नहीं मिल जाएगा?

कुछ ऐसा… जो ब्रह्मांड के बारे में हमारे सभी कयासों और अनुमानों को ध्वस्त कर हमें एक ऐसे महान आश्चर्य का साक्षात्कार कराए जिसका अनुमान हम अपनी बेहतरीन कल्पनाओं में भी अभी तक न कर पाएँ हों।

Maybe, Something equally awesome and awful, beyond the darkest corners of sky, is waiting to be discovered !!

Thanks For Reading !!!

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