Columbus | Why Moon is Red Sometimes? कोलंबस के लाल चांद का रहस्य

Secret-of-Columbus-and-the-Red-Moon

कोलंबस की यात्रा

वर्ष 1492 में समुद्री रास्ते से एशिया पहुंचने के चक्कर में गलती से अमेरिकन महाद्वीप को ढूंढ चुके Christopher Columbus ने नये विश्व की ओर अपनी चौथी यात्रा 11 मई, 1502 में स्पेन से शुरू की।

यात्रा के दौरान समुद्री दीमकों द्वारा दो जहाजों को चट कर देने के बाद मजबूरी वश Columbus को 25 जून, 1503 में एक समुद्री द्वीप पर शरण लेनी पड़ी जिसे आज आधुनिक विश्व में जमैका के नाम से जाना जाता है।

एक टुकड़ी को मदद के लिए रवाना करने के बाद Columbus ने स्थानीय जनजातियों से दोस्ती गांठ उनसे भोजन इत्यादि जरूरी मदद हासिल करने का बंदोबस्त किया। भोले-भाले स्थानीय लोग शुरू में तो इन अतिथियों की आवभगत में जुटे रहे पर 8 महीनों तक कोई मदद नहीं आयी। स्थानीय लोगों के पास खुद के लिए पर्याप्त भोजन के लाले पड़ने लगे तो उन्होंने Columbus को भविष्य में खाना खिलाने से विनतीपूर्वक मना कर दिया।

शातिर कोलंबस ने क्या ऐलान किया था?

बेहद मक्कार Columbus के पास किसी जर्मन खगोलविद की लिखी एक किताब थी जिसमें अगले कुछ सालों में होने वाली खगोलीय घटनाओं की भविष्यवाणी लिखी हुई थी। किस्मत से किताब में 3 दिन बाद होने वाले एक पूर्ण चन्द्रग्रहण का भी ज़िक्र था। Columbus के शातिराना दिमाग में एक योजना जन्म लेने लगी और उसने स्थानीय लोगों को बुला कर यह ऐलान किया कि –

चूंकि… तुम लोगों ने ईश्वर के प्रिय पुत्र Columbus को भोजन देने से मना कर दिया है… इसलिए मेरा ईश्वर… तुम लोगों पर बेहद कुपित है… और चूंकि मेरा ईश्वर तुम्हारे ईश्वर (चंद्रमा) से ज्यादा ताकतवर है… इसलिए तीन दिन बाद मेरा ईश्वर चंद्रमा को अपने क्रोध की लालिमा से रक्तरंजित कर देगा और यह तुम लोगों पर मेरे खुदा के कहर की शुरुआत होगी।

Columbus के मुंह से ऐसे वचन सुनने के बाद स्थानीय लोग संशयपूर्ण दुविधा में पड़ गए। तीन दिन बाद… Columbus के कहे अनुसार चंद्रमा पूरी तरह रक्तरंजित था… मानों किसी ने खून के छींटे मार दिए हों…

भय और आश्चर्य के मारे स्थानीय लोग दौड़ कर Columbus के कदमों में जा गिरे और उसकी सभी शर्तों को मान लिया…

इस तरह मूल अमेरिकन इंडियंस के भीषण नरसंहार के जिम्मेदार, मासूम बच्चियों को यौन दासी के तौर पर बेचने वाला बर्बर लुटेरा कोलंबस मजे के साथ मदद आने तक स्थानीय निवासियों के माल पर ऐश करता रहा।

ज्ञान वाकई खतरनाक चीज़ है, बशर्ते अगर यह अपात्र के हाथ में हो।

बहरहाल आपने भी देखा होगा कि कई बार चांद लाल रंग का होता है… ऐसा भला क्यों है?

आइए, समझते हैं कि चांद लाल क्यों हो जाता है?

चांद कभी-कभी लाल उसी कारण से दिखता है जिस कारण से हमारा आसमान नीला और उदय-अस्त होते समय सूर्य लाल रंग का दिखता है।

सरल शब्दों में… प्रकाश तरंगों का एक प्रकार हैं। लाल तरंगे सबसे ज्यादा मोटी होती हैं, नीली तरंगे सबसे सूक्ष्म…
जब सूर्य की रोशनी हमारे वातावरण में प्रवेश करती है तो बेहद सूक्ष्म ऑक्सीजन-नाइट्रोजन के कण प्रकाश की नीली तरंगों से टकरा कर उन्हें छितरा देते हैं, जिस कारण आसमान नीला दिखता है।

वहीं सूर्य उदय अथवा अस्त के समय सूर्य की पोजीशन क्षितिज (Horizon) पर होती है,
यानी उस समय प्रकाश को हम तक पहुंचने के लिए और ज्यादा हवा के अणुओं से होकर गुजरना पड़ता है,
और ज्यादा अणु मतलब नीली किरणों का और ज्यादा बिखराव… इतना ज्यादा बिखराव कि हमारी आंखों तक पहुंचने तक प्रकाश में लाल तरंगों के अतिरिक्त कुछ शेष नहीं रहता… इस कारण उदय तथा अस्त होते समय सूर्य हल्की पीली-लाल लालिमा लिए होता है।

पूर्ण चंद्रग्रहण के समय सूर्य और चंद्रमा के बीच क्या होता है?

पूर्ण चंद्रग्रहण के समय सूर्य और चंद्रमा के बीच में पृथ्वी होती है।
उस समय चंद्रमा तक पहुंचने वाले सूर्य के प्रकाश को पहले पृथ्वी के वातावरण से गुजरना पड़ता है और लौट कर आना भी इसी वातावरण से होते हुए।
इस दोहरी Scattering के कारण चन्द्रमा से टकरा कर हमारी आंखों तक पहुंचे प्रकाश में मुख्यतः लाल तरंगे ही होती हैं, इस कारण चांद लाल दिखता है।

सच कहूँ तो 700 नैनोमीटर का प्रकाश लाल इसलिए है
क्योंकि आपकी आंख में मौजूद विशेष कोशिकाएं इस मोटाई की
वेवलेंथ को “लाल” के तौर पर ग्रहण करने के लिए प्रोग्राम हैं।
वास्तव में न तो आसमान नीला है, न ही सूर्य अथवा चांद लाल होते हैं…
सब खेल आपकी इंद्रियों का है। आप की इन्द्रियाँ न हों तो यह संसार पूरी तरह रंगविहीन है।
रंग पूरी तरह इंसानी इंद्रियों से उत्पन्न एक भ्रम मात्र है।

तो अगली बार जब भी लाल चांद देखें तो याद रखियेगा… It is Red… Because You Are a Human !!!

And As Always Thanks For Reading !!!

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