Undeclared Sharia | सदियों पहले गढ़ी गयी रवायतों को अब बदलना जरूरी है!

Undeclared-Sharia

आप चाहे अमेरिका में रह रहें हो या फिर भारत में, अगर आप Muslim परिवार में जन्म लेते हैं तो आपको अपने घर में इस तरह की “Undeclared Sharia” का पालन करने के लिए बचपन से ही मजबूर किया जाता है… और ये इतना ज़्यादा पीड़ादायक होता है कि इसे दूसरे धर्म में पैदा हुए लोग कभी समझ ही नहीं सकते..!

एक युवा मित्र ने मुझ से पूछा था कि “मुझे सलाह दीजिये कि मैं क्या करूँ? रमज़ान आ गया है और मेरा छोटा भाई जो Sport में अपना Career बना रहा है उसको पापा ज़बरदस्ती रोज़ा रखवाते हैं… और अब एक महीने के लिए उसकी सारी Practice बंद करवा दी है… मैं भी एक Competition की तैयारी कर रहा हूँ लेकिन रोज़ा रहकर कुछ भी पढ़ा नहीं जाता है… और उस पर पापा का यह दबाव भी रहता है कि दोनों टाइम क़ुरआन की तिलावत करो, और पांचों वक़्त की नमाज़ पढ़ो… अब बताईये कि ये सब कैसे करूँ? आप बस यूं समझिए कि इस एक महीने के लिए हम लोगों की पढ़ाई और Practice कुछ नहीं हो पाती है.. अगर हम में से कोई भी इस से इनकार करता है तो पापा से दुश्मनी मोल ले लेगा, क्योंकि उनके लिए मज़हब पहले है, और हम सब बाद में”।

Undeclared Sharia एक तरह का “बाल उत्पीड़न” है!

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अगर विश्व के मानवाधिकार संगठन बच्चों पर हुए इस घरेलू अत्याचार का आंकड़ा जुटा कर उसे सार्वजनिक कर दें तो ये बेहद भयावह होगा… अब चूंकि ये सब सदियों से चल रहा है तो सभी इसे एक विशेष समुदाय की “संस्कृति” के तौर पर स्वीकार कर रखा है… जबकि सच्चाई ये है कि ये दुनिया का सबसे बड़ा “बाल उत्पीड़न” है।

परंतु इस जनरेशन का एक बहुत बड़ा हिस्सा इन सब से बाहर निकलना चाहता है… और ये लोग हम जैसों से सलाह लेते हैं.. न जाने कितनों ने मेरी सलाह पर अमल किया तो उनकी ज़िंदगी आज पूरी तरह से बदल गयी है।

इन पुरानी रवायतों को अब बदलने का समय है!

मैं ऐसे युवा लड़कों और लड़कियों को सबसे पहले यही सलाह देता हूँ कि “विरोध” करो… हिम्मत जुटाओ और फिर विरोध करो.. सबसे पहले अपने माँ और बाप का विरोध करो और उन रवायतों को एक किनारे रखो जो सदियों से तुम्हें समझाती आयी हैं कि “माँ बाप से ऊंची आवाज़ में बात करना गुनाह है..!” क्योंकि ये इन्हीं जैसे माँ-बापों की गढ़ी गयी रवायतें हैं… और इन्होंने ये एक तरफ़ा गढ़ी हैं, सिर्फ़ तुम्हारे उत्पीड़न के लिए… इनकी रवायतों में तुम्हें “बच्चों” का कोई स्थान नहीं मिलेगा.. इनकी रवायतें कभी यह नहीं बताती हैं कि बच्चों को मारना-पीटना और उनका उत्पीड़न करना गुनाह है, या नहीं..  ये “माँ के पैरों के नीचे जन्नत है…!” तो बता देंगे मगर बच्चे के पैरों के नीचे के नीचे क्या है ये तुम्हें कभी नहीं बताएंगे… इनका बच्चा, इनकी जागीर होता है…

और मेरे हिसाब से नब्बे प्रतिशत भारत के माँ-बाप, माँ और बाप बनने के लिए न तो तैयार होते हैं और न लायक़ होते हैं… बस उनके अम्मा और अब्बा कहीं से ढूंढ के रिश्ता करवा देते हैं और वो मां-बाप बन जाते हैं… फिर वो आपको सिखाते हैं कि हमसे ऊंची आवाज़ में बात मत करो, तुम्हारे साथ हम भले “Zombie” जैसा व्यवहार करें… इसलिए इस उत्पीड़न और ज़बरदस्ती पर चुप मत रहिए.. बोलिये और उसका विरोध कीजिये।

कोई आपके रीति-रिवाज और धार्मिक कर्मकांड नहीं मानना चाहता है तो उसे प्रताड़ित न करें!

इनको समझाइए कि बच्चे आपकी जागीर नहीं होते हैं…
बच्चों ने आपसे “प्रार्थना” नहीं की होती है कि “प्लीज हमें पैदा कीजिये हम बहुत परेशान हैं…!”
बच्चा पैदा करने के पीछे सौ प्रतिशत आपका स्वार्थ होता है… उसे पालते हैं,
क्योंकि आप उसे इस जीवन मे लाये हैं और ये आपकी ज़िम्मेदारी है…
आप मुसलमान थे या हिन्दू ये आपके बच्चे को नहीं पता था…
और अब वो यह रीति-रिवाज और धार्मिक कर्मकांड नहीं मानना चाहता है
तो ये पूरी तरह से उस पर निर्भर है… न कि आप पर… आप उसे प्रताड़ित नहीं कर सकते हैं।

विरोध की शुरुआत घरों से करनी होगी!

इसलिए नौजवानों, विरोध करो…! विरोध करना सीखो…!! सबसे पहले आपको अपने घर से विरोध की शुरुआत करनी है।
नमाज़ पढ़नी है तो पढ़ो..! नहीं पढ़नी है तो जो तुम्हें पढ़ने को बाध्य करे
उसे अपनी “स्वतन्त्रता” का आदर करने के लिए बाध्य कर दो।
घरों में Undeclared Sharia नहीं चलेगा… रोज़ा नहीं हो तो तुम्हें किसी को दिखाने की ज़रूरत नहीं है,
कि तुम रोज़ा हो.. टोपी लगा के फ़ालतू की Mis walk करने की कोई ज़रूरत नहीं है।
जो “Zombie” आपसे कहता है कि तीन जुम्मा नहीं पढ़ोगे तो काफ़िर हो जाओगे
तो उस से कहो कि “काफ़िर” होना “सर आखों पर”

तुम अगर इनके डराने से डरते रहोगे
तो ये और न जाने कितनी पीढ़ियों को ऐसे ही डरा-डरा कर भेड़ बनाये रहेंगे।
“डराने का अधिकार” इनसे छीन लो… इन्हें तुम इस वक़्त विज्ञान से डरा सकते हो…
विज्ञान की ताकत इस वक़्त इन्हें भली-भांति दिख रही है
और ऐसे वक्त में भी अगर ये तुमको “गुनाह” और “अज़ाब” से डरा ले जाएं
तो ये उनका नहीं, तुम्हारा नाकारापन होगा… इनसे सीना ठोंक कर सवाल करो।

मुसलमान अल्लाह से नहीं अपने आसपास के मुसलमानों से डरता है…
उसका यह डर ख़त्म हो जाये तो मुसलमानों की आधी से ज़्यादा आबादी नास्तिक हो जाएगी…
ये सब एक दूसरे के डर से उस अल्लाह की इबादत का दिखावा करते हैं
जिस से इन्हें रत्ती भर न तो लगाव होता है और न प्यार।

Undeclared Sharia के विरुद्ध तुम्हें ही खड़ा होना होगा!

घरों में Undeclared Sharia के विरुद्ध तुम्हें ही खड़ा होना होगा! हम जैसे लोग सिर्फ़ तुम्हें हिम्मत दे सकते हैं… बस !!

सयाने हमें समझाते हैं कि आप ग़लत बोल रहे हैं, कोई ज़बरदस्ती नहीं है हमारे मज़हब में !

ये उनके लिए है !

  • इरफान खान ने कहा कि उन्हें कुर्बानी नहीं पसंद है, तो मरने के बाद उन्हें गाली कौन दे रहा है… आप लोग !
  • क्रिकेटर मुहम्मद शमी की पत्नी डीप नेक ब्लाऊज़ पहन कर सोशल मीडिया पर फ़ोटो डाल देती है तो उसे लाखों की तादात में ट्रोल कर के गाली देने वाले कौन लोग हैं? आप जैसे लोग !!
  • ज़हीर खान ने अपनी पत्नी के साथ पूजा करते हुए फ़ोटो डाल दिया तो उसकी वाल गालियों से कौन भर देता हैं… आप जैसे लोग…!!!

जबकि ये सब लोग न तो इनके खुद के परिवार के हैं और न इनका उनसे कोई ताल्लुक है…
ऐसे दूसरे लोग, जो बस आपके मज़हब में गलती से पैदा हो गए हैं, उनके लिए ये इतने सख़्त हैं।

तो फिर ! आप ख़ुद कल्पना करिए कि

ऐसे लोग मज़हब को लेकर अपने परिवार, महिलाओं और बच्चों पर किस हद तक दबाव बनाते होंगे।

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