Your Truth | आप जो बोलते या लिखते हैं वैसे हों भी, यह जरूरी नहीं!

Your-Truth

आप अपने बारे में जो बोलते या लिखते हैं, वैसे आप हों भी, यह जरूरी नहीं, यही है –Your Truth!
यह भी जरूरी नहीं कि समाज में आपकी जैसी छवि है, आप बिल्कुल वैसे ही हों।
सामाजिक छवि अक्सर विचारों और कथन पर बनी होती है।
हो सकता है कि आपके कर्म पर सूक्ष्मता से लोगों की नजर न पड़े।

प्रसिद्ध कवि T. S. Eliot के शब्दों में,
इंसान बहुत ज्यादा सच्चाई या वास्तविकता को झेल नहीं सकता,
इसलिए जब आपके सच (Your Truth) को जाहिर किया जाता है, तो अक्सर वह कड़वा लगता है,
लेकिन जब इस पर लुभावने झूठ को सजा दिया जाता है,
तो यह सहजता के साथ स्वीकार कर लिया जाता है, और आनंदित भी करता है।

क्यों कुछ लोग अच्छे होने के बाद भी सफल नहीं होते,
जबकि कुछ सफल होने के बाद भी अच्छे नहीं होते?
क्या वजह है कि सफल व्यक्ति बड़ी सहजता से बुरा काम कर देता है?
क्या अच्छाई सफलता में बाधा बनती है?

ये सभी सवाल एक अच्छी और सफल जिंदगी का खाका खींचने में मदद करते हैं।
अरस्तु के अनुसार: अच्छी परिस्थितियों और ऐश्वर्य के बावजूद एक अच्छी जिंदगी इस बात पर निर्भर करती है
कि एक व्यक्ति सद्गुण के अनुसार व्यवहार करे।

यहां अल्बर्ट आइंस्टीन का भी जिक्र स्वाभाविक है।
वह कहते थे कि जो सही है,
वह हमेशा लोकप्रिय नहीं होता और जो लोकप्रिय है,
वह हमेशा सही नहीं होता। यह बात खुद उनके ऊपर भी लागू होती है।


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