Zombie | क्या डरावने जॉम्बी सच में होते हैं? (In Hindi)

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आपने Zombie वाली फ़िल्में तो देखी ही होंगी। हॉलीवुड फिल्मों को पसंद करने वाले ये अच्छी तरह जानते हैं कि ऐसी फिल्मों की कितनी लम्बी फेरहिस्त है। ये तो हुई फिल्मों की बात अब आगे जानते हैं कि वास्तविक जीवन में क्या वास्तव में जॉम्बीज होते हैं? Do zombies really exist?

पहले जानते हैं कि Zombie क्या है?

यह शब्द सबसे पहले Haitian लोककथाओं में मिलता है। Ancient Stories और Myths में Zombie का अर्थ होता है ‘जिन्दा लाश’। ज़ॉम्बी शब्द का उल्लेख अंग्रेजी में पहली बार 1819 में ब्राजील के इतिहास में कवि रॉबर्ट साउथी द्वारा “ज़ॉम्बी” के रूप में किया गया था। ये ऐसे व्यक्ति के लिए भी प्रयोग किया जाता है, जो अपनी संवेदना खो चुका है।

यानि ऐसी मृत देह जिसे संभवतः किसी जादूगर ने अपनी तिलिस्मी शक्तियों से जीवित कर दिया हो, और जो अब उस जादूगर के आदेशों की गुलाम हो। उसे Zombie कहा जाता है। अब वर्तमान Hollywood फिल्मों में इसे और अधिक यथार्थपरक बनाने के लिए जादूगर की संज्ञा ऐसे खतरनाक वायरस को दे दी गयी है जो लोगों को संक्रमित कर उन्हें मानव रक्त की प्यासी जिन्दा लाशों में तब्दील कर देता है।

इन्हें देखकर एक सवाल मन में सहज ही उठता है कि क्या वास्तव में दूसरे जीवों के शरीर में रहने वाले सूक्ष्म वायरस अपने आकार से हजारों गुना बड़े किसी जीव के व्यवहार को नियंत्रित कर सकते हैं?

जॉम्बीज का वास्तविक जीवन में क्या उदाहरण है?

तो इसका जवाब है, हाँ! इसके एक नहीं बहुत सारे उदाहरण हैं।

सूक्ष्म परजीवियों का जीवन चक्र एक होस्ट से दूसरे होस्ट तक पहुँचने पर निर्भर करता है, कई बार वे होस्ट के व्यवहार को नियंत्रित ही नहीं कर लेते बल्कि ये कहा जा सकता है कि सीधे-सीधे वे होस्ट के ब्रेन को ही हाइजैक कर लेते हैं।

Horsehair worm

गॉर्डियन वर्म जिसे इसकी बनावट के कारण Horse hair worm भी कहा जाता है एक ऐसा ही परजीवी है। ये परजीवी कई प्रजातियों के कीटों को अपना निशाना बनाते हैं और उनके शरीर में पलते रहते हैं। इनके पसंदीदा शिकारों में से एक है झींगुर। झींगुर के शरीर में चुपचाप पलता ये परजीवी उसे अधिकांश समय कोई कष्ट नहीं देता सिवा तब के जब उसे प्रजनन करना होता है।

Zombie
Photo by Alastair Rae

प्रजनन योग्य होने पर उसे किसी नदी या पोखर की तलाश रहती है जहाँ ये मादा साथियों के साथ सहवास कर प्रजनन कर सके। अब झींगुर को पानी में जाना तो पसंद नहीं होता। तब ये परजीवी एक खास किस्म के प्रोटीन का निर्माण करता है जो झींगुर के व्यवहार को इस तरह नियंत्रित कर लेता हैं कि वह एक Zombies की तरह गिरता पड़ता पानी में जम्प मार देता है, बस वहीं उसका The End हो जाता है।

झींगुर के पानी में पहुँचते ही ये परजीवी उसके शरीर से बाहर आकर सहवास और प्रजनन करता है, इसके अण्डों को पानी में मौजूद मच्छर जैसी कई प्रजातियों कीटों के लार्वा द्वारा खा लिया जाता है। बाद में जब ये लार्वा मेटामोर्फोसिस के द्वारा मच्छर जैसे उड़ने की क्षमता को प्राप्त कर लेते हैं तो ये पानी को छोड़कर बाहर निकल आते हैं जिनमें से कुछ का झींगुरों तथा कुछ अन्य प्रजातियों के कीटों द्वारा शिकार कर लिया जाता है, जिसके जरिये ये पुनः अपने होस्ट के शरीर में पहुँच जाते हैं।

Parasitic fungus

अमेज़न के घने जंगलों में पायी जाने वाली एक परजीवी फंगस भी कुछ इसी तरह अपने होस्ट के व्यवहार को नियंत्रित कर अपना जीवन चक्र पूरा करती है। इसका पसंदीदा शिकार है चींटियाँ। हवा में तैरते इसके सूक्ष्म बीजाणु चींटियों के बाहरी कवच को भेदकर उनके शरीर में प्रवेश कर जाते हैं और धीरे धीरे चींटी के व्यवहार को नियंत्रित करने लगते हैं।

इससे संक्रमित चींटी अपने दैनिक कार्यों को छोड़कर फंगस के लिए माकूल किसी नम जगह की तलाश में निकल पड़ती है। उपयुक्त जगह मिलने पर ये पास में मौजूद किसी पेड़ की पत्ती में अपने दांत गड़ाकर अपनी मौत का इन्तजार करती है। इस दौरान शरीर में मौजूद फंगस चींटी के शरीर में मौजूद उर्जा का उपभोग कर अगले चरण की तैयारी करती है। जिसमें चींटी के सर से बीजाणुओं युक्त एक सिरा उगता है जिसमें मौजूद बीजाणु हवा के माध्यम से आस पास फ़ैल जाते हैं और पुनः किसी चींटी को अपना शिकार बनाते हैं।  

Toxoplasma

टैक्सोप्लाज्मा नामक एक बैक्टीरिया अपना जीवन चक्र चूहों के व्यवहार को नियंत्रित कर पूरा करता है।
इससे संक्रमित चूहे के भीतर से शिकारी का भय ख़त्म हो जाता है।
लिहाजा वह बिल्ली के सामने बहादुरी से डटा रहता है और नतीजतन शिकार हो जाता है।
बिल्ली के मल में इसके जीवाणुओं की मौजूदगी रहती है
जो कि सम्पर्क में आने वाले जीवों को संक्रमित कर देती है।
ये बैक्टीरिया मनुष्यों को भी संक्रमित करता लेकिन कुछ मामलों को छोड़कर मनुष्यों में कोई ख़ास लक्षण पैदा नहीं करता।

Rabies virus

रैबीज वायरस भी एक ऐसा ही परजीवी है
जो अपने होस्ट के व्यवहार को नियंत्रित कर अपना जीवन चक्र पूरा करता है।
इसका शिकार ज्यादातर कुत्ते होते हैं। ये वायरस होस्ट के दिमाग में गंभीर संक्रमण पैदा करता है
जिससे अंत में उसकी मौत हो जाती है। लेकिन उससे पहले ये उसकी आक्रामकता को बढ़ा देता है
और साथ ही गले में सूजन पैदा कर निगलना मुश्किल कर देता है।
संक्रमित होस्ट के मुहँ में वायरस युक्त लार का उत्पादन बढ़ जाता है
जो कि निगल न पाने के कारण मुहँ से झाग जैसे निकलती रहती है।
बढ़ी आक्रामकता के कारण संक्रमित कुत्ता अपने आस पास
मौजूद जीवों पर हमला कर उन तक भी वायरस पहुंचा देता है। 

ये तो मात्र कुछ उदाहरण हैं, जीव जगत में ऐसे कई उदाहरण मौजूद हैं
जिन्हें खोजा गया है और न जाने कितने ही ऐसे होंगे जो कि अभी खोजे जाने बाकी हैं।
फ़िल्मी पर्दे पर दिखाए जाने वाले Zombie को देख कर आपके मन में भले ये सवाल कौंधे
कि क्या Do zombies really exist? जबकि वास्तविकता तो यह है
कि जीव जगत में तमाम Zombie हमारे आस पास और बहुत निकट मौजूद हैं।


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